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सांगला कंडे, किन्नौर में स्थित प्राकृतिक झील की जांच

किन्नौर के सांगला कंडे में बनी प्राकृतिक झील की जांच

सांगला कंडे, किन्नौर में स्थित इस प्राकृतिक झील की जांच में हम इसके अद्भुत सौंदर्य और पारिस्थितिक तंत्र की गहराई से समीक्षा करेंगे। इस झील की प्राकृतिक विशेषताओं, पर्यावरणीय महत्व, और क्षेत्रीय विकास पर इसके प्रभाव को समझने के लिए एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा। यह झील न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यटकों के आकर्षण का भी केंद्र है।

हिमालयी क्षेत्र किन्नौर में दो अलग-अलग स्थानों पर विशाल प्राकृतिक झीलों के निर्माण को देखते हुए भविष्य में संभावित खतरों को भांपते हुए किन्नौर प्रशासन ने इन झीलों की जांच शुरू कर दी है। इन झीलों की वास्तविक स्थिति को जानने के लिए किन्नौर प्रशासन ने आर्मी, आईटीबीपी, डिजास्टर मैनेजमेंट और स्थानीय लोगों की एक टीम गठित की है। लगभग 50 लोगों की यह टीम 7 सितंबर को सांगला कंडे के परपाबंग क्षेत्र के लिए रवाना हुई। चार दिन के भीतर, इस टीम ने सफलतापूर्वक अभियान को पूरा कर लिया और सुरक्षित वापस लौट आई। यह भी ध्यान देने योग्य है कि झील तक पहुंचने के लिए दल ने पहला प्रयास 3 सितंबर को किया था, जो किन्हीं कारणों से सफल नहीं हो पाया था। 7 सितंबर को दूसरी बार शुरू किया गया यह अभियान रूट गाइड पदम हंस रिपाल्टो के नेतृत्व में किया गया।

7 सितंबर को सांगला से शुरू किए गए इस एक्सपीडिशन के दौरान सभी सदस्य देवर कंडा कैंप वन में रुके। अगले दिन, 8 सितंबर को, सभी ने कैंप टू में विश्राम किया और 9 सितंबर को देवर कंडे के परपाबंग क्षेत्र में स्थित लगभग 500 मीटर लंबी, 200 मीटर चौड़ी और 28 मीटर गहरी प्राकृतिक झील की विशेषज्ञों द्वारा जांच की गई। इस जांच के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग किया गया। अब टीम के सदस्य वापस सांगला लौट चुके हैं। किन्नौर के सांगला कंडे के परपाबंग क्षेत्र में स्थित इस प्राकृतिक झील की संरचना और आकार के साथ-साथ भविष्य में संभावित खतरों के बारे में अभी तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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