हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया को खारिज कर दिया।
कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति रद्द, हाईकोर्ट का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अजयदीप बिंद्रा की याचिका को स्वीकारते हुए यह फैसला सुनाया।
चयन समिति को अवैध करार दिया
कोर्ट ने राज्यपाल द्वारा गठित चयन समिति को अवैध ठहराते हुए समिति की सभी गतिविधियों को निरस्त कर दिया। अदालत ने पाया कि यह समिति हिमाचल प्रदेश कृषि, बागबानी और वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1986 की धारा 24 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।
याचिकाकर्ता का क्या था आरोप?
याचिकाकर्ता चौधरी श्रवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में कृषि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि राज्यपाल (कुलाधिपति) द्वारा बनाई गई चयन समिति ने कुलपति पद के लिए गलत प्रक्रिया अपनाई। समिति ने अधिनियम के खिलाफ जाकर विज्ञापन जारी किया और उसमें अनुचित शर्तें जोड़ी।
राज्यपाल की ओर से क्या दलील दी गई?
राज्यपाल की ओर से दलील दी गई कि कुलपति चयन समिति के गठन के लिए यूजीसी (UGC) अध्यक्ष और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक से सहमति ली गई।
हालांकि, आईसीएआर महानिदेशक ने देरी से जवाब दिया और उप महानिदेशक को नामित किया।
विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति पहले ही 6 महीने से अधिक विलंबित थी, इसलिए महानिदेशक के बजाय उप महानिदेशक की सिफारिश को स्वीकार किया गया।
कोर्ट का अंतिम फैसला
हाईकोर्ट ने सभी रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि चयन समिति का गठन विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 24 का उल्लंघन करता है।
कोर्ट ने कहा कि कानून में जिस प्रक्रिया का उल्लेख है, उसी का पालन किया जाना चाहिए।
कानूनी रूप से अवैध चयन समिति द्वारा की गई सभी गतिविधियां अमान्य होंगी।
क्या होगा अब?
अब सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को नए सिरे से चयन समिति का गठन कर सही प्रक्रिया के तहत कुलपति की नियुक्ति करनी होगी। यह मामला हिमाचल प्रदेश में शिक्षा प्रशासन और विश्वविद्यालय स्वायत्तता को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।