हिमाचल प्रदेश में अब फोरेंसिक जांच के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे अपराधियों की पहचान और जांच प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सटीक होगी। एआई की मदद से सीसीटीवी फुटेज, फोटो और डिजिटल डेटा का विश्लेषण करके संदिग्धों की पहचान करना आसान होगा।
फोरेंसिक साइंस में AI से चेहरों और आवाज की पहचान होगी आसान
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल से अब चेहरों की पहचान और आवाज के विश्लेषण में आसानी होगी। फोरेंसिक साइंस (Forensic Science) में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे जांच प्रक्रिया तेज और सटीक हो रही है।
फोरेंसिक साइंस में AI की भूमिका पर प्रशिक्षण कार्यक्रम
फोरेंसिक्स सेवा निदेशालय, जुन्गा (Junga) में मंगलवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (State Forensic Science Laboratory) जुन्गा के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। वहीं, क्षेत्रीय विज्ञान प्रयोगशाला उत्तरी रेंज धर्मशाला (Dharamshala), क्षेत्रीय विज्ञान प्रयोगशाला मध्य रेंज मंडी (Mandi), जिला फोरेंसिक इकाई बिलासपुर (Bilaspur), बद्दी (Baddi) और नूरपुर (Nurpur) के अधिकारी व कर्मचारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
AI के फोरेंसिक अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान एसएफएसएल (SFSL) की निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन और सहायक निदेशक डिजिटल फोरेंसिक्स (Digital Forensics) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ डॉ. गौरव जसवाल ने AI की मूलभूत अवधारणाओं और न्यायालयिक जांच में इसके उपयोग (Applications) पर महत्त्वपूर्ण जानकारी दी।
AI से जांच प्रक्रिया में सुधार
AI की सहायता से मशीनें डेटा (Data) का विश्लेषण, पैटर्न (Pattern) की पहचान और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ सटीक भविष्यवाणी (Prediction) कर सकती हैं। डॉ. जसवाल ने बताया कि AI विभिन्न न्यायालयिक क्षेत्रों (Forensic Fields) में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है।
AI से आसान होगी साइबर अपराध और पहचान प्रक्रिया
AI का उपयोग साइबर अपराध विश्लेषण (Cyber Crime Analysis), चेहरे की पहचान (Face Recognition), डिजिटल फोरेंसिक्स (Digital Forensics), स्पीच और वॉइस एनालिसिस (Speech & Voice Analysis), दस्तावेज़ विश्लेषण (Document Analysis), ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट एनालिसिस (Automated Fingerprint Analysis) और डीएनए मिलान (DNA Matching) में किया जा रहा है। इससे जांच प्रक्रिया अधिक तेज़ और सटीक हो सकेगी।