भारत में कैंसर मरीजों के लिए इलाज अब और भी सुलभ हो रहा है। हर साल करीब 8.5 लाख मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिल रही हैं, जिससे उन्हें बड़े शहरों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। जानें कैसे बेहतर हो रही है स्वास्थ्य सेवाएं।
कैंसर मरीजों को घर के पास बेहतर इलाज
नेशनल कैंसर ग्रिड से जुड़े संस्थान हर साल करीब 8.5 लाख कैंसर मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जो देश के कुल कैंसर मरीजों का 60% है। यह ग्रिड कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक शक्तिशाली संगठन बन चुका है। अब यह मरीजों को उनके घर के पास ही बेहतर इलाज देने के लिए डिजिटल टेक कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है।
योग से कैंसर मरीजों को बड़ा लाभ
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि कैंसर मरीजों पर किए गए क्लिनिकल परीक्षण में योग के लाभ सामने आए हैं। स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की रोग मुक्त होने की दर योग से 15% तक बढ़ जाती है, जबकि कैंसर मरीजों की समग्र जीवित रहने की दर 14% तक बढ़ी है।
नेशनल कैंसर ग्रिड का विस्तार और नई तकनीक
वर्तमान में नेशनल कैंसर ग्रिड से 340 कैंसर सेंटर, अनुसंधान केंद्र, चैरिटेबल संस्थाएं और प्रोफेशनल समितियां जुड़ी हैं। यह ग्रिड कैंसर के कारणों और नए उपचार की खोज के लिए नेशनल ट्यूमर टिश्यू बायो बैंक संचालित कर रहा है।
किफायती कैंसर इलाज की सुविधा
परमाणु ऊर्जा विभाग के सहयोग से टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई उच्च गुणवत्ता वाला कैंसर इलाज किफायती दरों पर उपलब्ध करा रहा है। यहां 60% सामान्य मरीजों को उच्च अनुदान या लगभग मुफ्त इलाज मिलता है, जबकि 40% मरीजों को इलाज के लिए भुगतान करना पड़ता है।
देश में 12 ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का निर्माण
केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने संसद में बताया कि 2014 के बाद देश में 12 ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का निर्माण और परिचालन किया गया है। इनमें दुर्गापुर, शिरडी, कन्नौर, पक्योंग, कलबुर्गी, कुर्नूल, सिंधुदुर्ग, कुशीनगर, ईटानगर, मोपा, शिवामोग्गा और राजकोट शामिल हैं।