हिमाचल के सामने वित्त वर्ष 2025.26 में आर्थिक चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि राज्य सरकार का लोन अर्श पर है, तो केंद्र से मिलने वाला अनुदान फर्श पर। खुद बजट बुक कहती है कि इस वित्त वर्ष में राज्य के ऊपर 1,03,563 करोड़ का लोन है।
मुख्यमंत्री ने बजट में आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नई योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने विकास कार्यों को गति देने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।
हिमाचल के सामने आर्थिक चुनौतियों का बड़ा पहाड़
हिमाचल प्रदेश के सामने वित्त वर्ष 2025-26 में गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि राज्य सरकार का Loan बहुत ऊंचे स्तर पर है, जबकि केंद्र से मिलने वाला Grant बेहद कम हो गया है। बजट बुक के अनुसार, इस वित्त वर्ष में राज्य पर ₹1,03,563 करोड़ का कर्ज है। केंद्र सरकार ने राज्य के वार्षिक लोन को ₹6,551 करोड़ तक सीमित किया है, लेकिन इतनी लोन लिमिट से पूरे साल का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। राज्य के पास इस सीमा से अधिक लोन लेने का विकल्प नहीं है। दूसरी ओर, केंद्र से मिलने वाली Revenue Deficit Grant इस साल सिर्फ ₹3,200 करोड़ है, जो अब तक के न्यूनतम स्तर पर है।
पेंशन और लोन रीपेमेंट का बढ़ता दबाव
आर्थिक चुनौतियों की एक बड़ी वजह Pension और Loan Repayment का बढ़ता बोझ है। पिछले एक साल में पेंशन की देनदारी में 3% और लोन रीपेमेंट की देनदारी में 2% की वृद्धि हुई है। इसके कारण राज्य सरकार का Capital Expenditure यानी पूंजीगत व्यय 4% तक घट गया है। ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में पेंशन का खर्च और बढ़ेगा। फिलहाल राज्य में कर्मचारियों की संख्या 1,90,481 पर स्थिर है और उनके वेतन पर हर साल ₹14,717 करोड़ खर्च हो रहे हैं। सरकार ने पिछले दो साल में ₹29,046 करोड़ का ऋण लिया, जिसमें से करीब ₹20,000 करोड़ पुराने लोन के ब्याज और किस्त चुकाने में चला गया।
केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद
हिमाचल को इस साल केंद्र से Post Disaster Need Assessment के तहत राहत राशि और BBMB Arrears से बिजली मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, अगले वित्त वर्ष 2026-27 से नया Finance Commission Award शुरू होगा। अगर Revenue Deficit Grant में कटौती नहीं हुई, तो राज्य को कुछ राहत मिल सकती है।
अर्थव्यवस्था में मंदी को लेकर मुख्यमंत्री ने दी चेतावनी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने बजट भाषण में देश में Economic Slowdown की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति चिंताजनक है क्योंकि उद्योगों की वृद्धि दर धीमी हो रही है, जिससे Employment और Business पर असर पड़ रहा है। रुपये की कमजोरी के कारण Inflation बढ़ सकती है। सरकार ने राजस्व सुधार के लिए जो कदम उठाए हैं, उनका असर दिख रहा है। इस साल VAT में 28%, State Excise में 21%, Electricity में 17%, Mining में 16%, Vehicle Tax में 16% और Stamp Duty व Registration Fee में 10% की वृद्धि हुई है।