ऊना जिले में सरकारी स्कूलों में दाखिले को बढ़ावा देने के लिए शिक्षक जागरूकता अभियान चला रहे हैं, लेकिन खुद उनके बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। यह विरोधाभास शिक्षा विभाग की नीतियों पर सवाल खड़े कर रहा है।
अभिभावकों की नाराजगी
ऊना जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को प्रेरित कर रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि कई शिक्षक खुद अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब शिक्षकों को ही सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं है, तो वे दूसरों को कैसे समझा सकते हैं?
शिक्षक संघ का पक्ष
अंब अध्यापक यूनियन के प्रधान जगदेव सिंह ने कहा कि यदि सरकार कानून बनाती है कि सभी सरकारी कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढ़ें, तो वे इसके लिए तैयार हैं।
स्कूल प्रशासन की प्रतिक्रिया
बड़ूही स्कूल के मुख्य अध्यापक संजय धीमान ने माना कि उनके स्कूल के कुछ शिक्षकों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बदलाव की शुरुआत शिक्षकों को खुद से करनी होगी।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
शिक्षा उपनिदेशक अनिल कुमार ने कहा कि हर शिक्षक के बच्चे निजी स्कूलों में नहीं पढ़ते, लेकिन जो ऐसा कर रहे हैं, उन्हें सरकारी स्कूलों में बच्चों को दाखिल करवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।