इन बांधों में जल स्तर कम होने के कारण आने वाले महीनो में बिजली उत्पादन और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। प्रदेश में ग्राउंड वाटर भी कम होता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग का काफी असर है जो लगातार बढ़ता जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में कम बारिश के कारण बांधों का जलस्तर घटा, जिससे विद्युत उत्पादन और सिंचाई पर असर पड़ेगा।
गर्मी के साथ बढ़ी जल संकट की चिंता
गर्मी के मौसम के करीब आते ही हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बांधों में जलस्तर में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है, जिससे बिजली उत्पादन और सिंचाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
बांधों में जलस्तर गिरा, संकट गहराया
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के जलाशयों में जल स्तर सामान्य से क्रमशः 46% और 52% कम है।
भाखड़ा और पौंग बांध की स्थिति चिंताजनक
भाखड़ा बांध में वर्तमान जल भंडारण 1.247 बीसीएम है, जबकि इसकी कुल क्षमता 6.229 बीसीएम है, यानी सिर्फ 20%।
पिछले 10 वर्षों का औसत भंडारण 33% रहा है, जिससे साफ है कि इस साल जल संकट अधिक गंभीर हो सकता है।
पौंग बांध की स्थिति और भी खराब है, जहां 0.816 बीसीएम पानी उपलब्ध है, जबकि इसकी कुल क्षमता 6.157 बीसीएम है। यह मात्र 13% भरा हुआ है, जबकि 10 साल का औसत 25% रहा है।
थेन बांध भी जल संकट की चपेट में
पंजाब में रावी नदी पर स्थित थेन बांध की स्थिति भी चिंताजनक है।
इसकी कुल भंडारण क्षमता 2.344 बीसीएम है, लेकिन वर्तमान में इसमें 0.469 बीसीएम पानी ही उपलब्ध है।
बांध 20% क्षमता तक भरा हुआ है, जबकि पिछले 10 वर्षों का औसत 41% रहा है।
विद्युत उत्पादन और सिंचाई पर असर
हिमाचल प्रदेश और पंजाब में मौजूद इन प्रमुख बांधों की संयुक्त जलविद्युत उत्पादन क्षमता 3,175 मेगावाट है।
सिंचाई क्षमता 10,24,000 हेक्टेयर है, जिससे कई राज्यों को पानी मिलता है।
इनमें गिरता जलस्तर आने वाले महीनों में बिजली उत्पादन और कृषि पर बुरा असर डाल सकता है।
ग्लोबल वार्मिंग की बढ़ती मार
लगातार बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से ग्राउंड वॉटर लेवल भी गिर रहा है।
जलाशयों में पानी की कमी का मुख्य कारण बर्फबारी में कमी और बारिश की असमानता मानी जा रही है।
पंजाब में भी सूखा जैसा हाल
27 मार्च के जलाशय संग्रहण बुलेटिन के अनुसार, इन जलाशयों में 4.733 बीसीएम पानी है, जो कुल संग्रहण क्षमता का मात्र 24% है।
पिछले साल इसी समय 32% जल संग्रहण था, और सामान्य स्तर 33% रहता था।
यानी इस साल जलस्तर पिछले वर्ष और औसत दोनों से कम है।
मार्च में बारिश ने दिया धोखा
1 मार्च से 28 मार्च तक पंजाब में मात्र 7.6 मिमी बारिश हुई, जबकि औसतन 21.5 मिमी होनी चाहिए थी, यानी 65% की भारी कमी।
हिमाचल प्रदेश में भी मार्च में अब तक 28% कम बारिश हुई है, जिससे जल संकट और गहरा गया है।
भविष्य की चिंता
अगर यही स्थिति बनी रही तो गर्मी के महीनों में जल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। सरकार और प्रशासन के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है।